जिले में चल रहे विशेष भूमि सर्वेक्षण के तहत पंचायत स्तर पर ग्राम सभाओं का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें रैयतों (भूमि धारकों) को उनके भूमि दस्तावेजों के सत्यापन के लिए प्रेरित किया जा रहा है। प्रशासन का उद्देश्य है कि सर्वेक्षण प्रक्रिया में कोई त्रुटि न रहे और हर किसान का रिकॉर्ड सही ढंग से दर्ज हो। इसके लिए अमीनों की टीम गांव-गांव जाकर शिविर लगा रही है, जहां रैयत अपने खसरा-खतौनी, रजिस्ट्री और अन्य दस्तावेजों का मिलान करा सकते हैं।
जिलाधिकारी के निर्देश पर सभी पंचायतों में ग्राम सभा की बैठकें आयोजित की जा रही हैं, जिनमें भूमि सर्वेक्षण के महत्व और प्रक्रिया की विस्तृत जानकारी दी जा रही है। अधिकारियों ने बताया कि सर्वेक्षण के दौरान यदि किसी रैयत के दस्तावेजों में विसंगति मिलती है तो उसे मौके पर ही दूर करने का प्रयास किया जा रहा है। ग्राम सभाओं में लोगों को यह भी बताया जा रहा है कि वे अपने भूमि संबंधी दस्तावेजों को सुरक्षित रखें और सर्वेक्षण टीम के साथ पूरा सहयोग करें।
अमीनों की टीम द्वारा गांवों में लगाए जा रहे शिविरों में रैयतों के दस्तावेजों की जांच की जा रही है और आवश्यक सुधार के लिए निर्देश दिए जा रहे हैं। टीम के सदस्यों ने बताया कि कई गांवों में रैयतों में जागरूकता की कमी के कारण दस्तावेजों में त्रुटियां पाई गई हैं, जिन्हें ग्राम सभाओं के माध्यम से दूर किया जा रहा है। शिविरों में रैयतों को उनके भूमि के नक्शे, सीमांकन और अन्य विवरण भी दिखाए जा रहे हैं, ताकि वे अपने अधिकारों के प्रति सजग रहें।
स्थानीय प्रशासन ने सभी संबंधित विभागों को निर्देश दिए हैं कि वे सर्वेक्षण कार्य में तेजी लाएं और किसी भी प्रकार की लापरवाही न बरतें। जिलाधिकारी ने कहा कि विशेष भूमि सर्वेक्षण राज्य सरकार की प्राथमिकता है और इससे भूमि विवादों का समाधान होगा तथा राजस्व रिकॉर्ड मजबूत होंगे। उन्होंने रैयतों से अपील की है कि वे ग्राम सभाओं और शिविरों में अधिक से अधिक संख्या में भाग लें और अपने दस्तावेजों का सत्यापन कराएं।
ग्रामीणों ने इस पहल का स्वागत किया है और कहा है कि इससे उन्हें अपनी भूमि के सही रिकॉर्ड की जानकारी मिल रही है। कई रैयतों ने बताया कि पहले उन्हें दस्तावेजों के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं थी, लेकिन अब ग्राम सभाओं और शिविरों के माध्यम से उन्हें सब कुछ समझ आ रहा है। प्रशासन का कहना है कि आने वाले दिनों में और अधिक गांवों में शिविर लगाए जाएंगे, ताकि कोई भी रैयत सर्वेक्षण प्रक्रिया से वंचित न रहे।